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कैसे हकलाना control करें
हकलाने का कोई जादुई और तुरंत इलाज नहीं है। चिकित्सा, एलेक्ट्रोनिक उपकरण, या दवाइयाँ, कोई भी, इसे रातों रात ठीक नहीं कर सकता है। हालांकि जो लोग हकलाते हैं, वे भली भांति बोल पाने के लिए इस स्थिति का मुक़ाबला स्पीच थेरपिस्ट की सहायता से स्वयं भी कर सकते हैं। यदि आप वास्तव में, हकलाहट ठीक करना चाहते हैं, और अपना नया जीवन शुरू करना चाहते हैं, तब इन सुझावों और तकनीकों को पढ़िये।
1- मानसिक और शारीरिक तौर से रिलैक्स करिए: ख़ुद को बताइये कि आप ठीक हो जाएँगे। जब आप सोचते हैं कि आप हकलाएंगे, तब आप उसके होने की संभावना को बढ़ा देते हैं। अपने दिमाग और शरीर, दोनों को रिलैक्स कराइए।

अपने शरीर को रिलैक्स करिए:
अपनी पीठ, गर्दन और बाहों में तनाव से छुटकारा पाइये। कंधों को रिलैक्स करिए; और उनको अपने प्राकृतिक स्तर तक नीचे आने दीजिये।
बोलने से कुछ सेकंड पहले अपने होंठ फड़फड़ाइए। गायक, गाने से पहले, इसी तरह से वार्म-अप करते हैं।
बाहों और पैरों में जो भी तनाव हो, उसे झटक कर दूर करिए। अंगड़ाई लीजिये।
मस्तिष्क को रिलैक्स करिए।
ख़ुद को बताइये: “मैं इस हकलाहट से बड़ा हूँ; हकलाहट मुझसे बड़ी नहीं है!”
ख़ुद से यह मत कहिए कि यह जीने और मरने का सवाल है। हकलाहट से चिढ़ तो होती है, मगर यह दूसरों के लिए उतनी बड़ी समस्या नहीं है, जितनी आपके लिए। इसी विचार से रिलैक्स होइए।
ध्यान को अपने मन पर केन्द्रित करिए। फिर नियमित सांसें लेते हुये, ध्यान को अपने शरीर के टिप्स पर जाने दीजिये। इसको एक तरह के मेडिटेशन की तरह भी किया जा सकता है।
2
शीशे के सामने खड़े हो जाइए, और कल्पना करिए कि दिखने वाला व्यक्ति कोई और है: किसी भी चीज़ के बारे में बातें करना शुरू करिए – आपका दिन कैसा रहा, आप कैसा महसूस कर रहे हैं, बाद में आप क्या खाएँगे – और देखिये कि आपकी हकलाहट गायब हो जाएगी।
यह तो सच है कि शीशे के सामने बात करना सचमुच के व्यक्ति से बात करने से फ़र्क है, परंतु ये अभ्यास आपके आत्मविश्वास को अच्छा बढ़ावा देगा। जब आप किसी से बात करने की तैयारी करें, तब याद रखिए कि आपने शीशे के सामने कितनी अच्छी तरह से बोला था।
प्रति दिन अपने आपसे 30 मिनट बातें करने की कोशिश करिए। शुरू में तो यह अजीब लगेगा, मगर यह अभ्यास आपकी बिना हकलाहट की आवाज़ को सुनने के बारे में है। इससे आपको बहुत विश्वास मिलेगा।

3
किताबों को सस्वर पढ़िये: इससे आपका आकर्षण कौशल बढ़ेगा। बस, ज़ोर से पढ़िये। शुरू में तो यह कठिन लगेगा, मगर इससे आपको सांस लेने की शिक्षा मिलेगी। हकलाने वाले व्यक्तियों की एक बड़ी समस्या, यह जानना होती है, कि पढ़ते और बोलते समय सांस कब ली जाये, साथ ही आपको हकलाहट से बाहर आने का अभ्यास होगा।
4
जो शब्द आप बोलने जा रहे हैं, उसका चित्र अपनी कल्पना में लाइये: इसमें महारत हासिल करना तो मुश्किल है, मगर इससे मदद मिलती है। अगर आप शब्दों की कल्पना कर सकते हैं, तब वे आपके हो जाते हैं, और फिर वे फिसल कर हकलाहट के क्षेत्र में नहीं जाएँगे। अगर आप उनकी कल्पना नहीं कर सकते हैं, तब वे आपके हो ही नहीं सकते। जो भी आप कहने जा रहे हैं, उसका स्पष्ट मानसिक चित्र बना लीजिये।

अगर आप किसी विशेष शब्द पर लड़खड़ा रहे हों, तो कोई ऐसा शब्द इस्तेमाल करिए जिसका वही अर्थ हो – पर्याय। हो सकता है कि यह शब्द आसान हो, जिस पर कि आप फिसल नहीं जाएँगे।
अगर आप किसी शब्द पर लड़खड़ाते हैं, तो उसको स्पेल (spell) करने का प्रयास करिए। शायद आप उसको धीरे धीरे और एक-एक अक्षर कर के बोलेंगे, मगर आपको ये तो संतोष होगा कि आप उसे बोल पाये।
अगर आपको शब्दों की कल्पना करने, या उनको स्पेल करने में समय लगता है, तो भी उससे डरिए मत। हमें यह शिक्षा दी गई है कि चुप्पी भयानक होती है; आपको अपने आपको यह सिखाना है कि चुप्पी एक अवसर है, और आपको उसका लाभ उठाना है।

5
जब आप हकलाते हैं, तो कोशिश करिए कि ब्लॉकों के बीच से तनाव निकालने की कोशिश की जाये: हर ब्लॉक के अंत में, गले से गहरी आवाज़ निकालने का अभ्यास करिए। जैसे कि: "It's s-s-s-s-s-. GRRRRRR It's silly." रुक कर "Blah" कहिए, और फिर चालू हो जाइए।

6
दिमाग के सही फ़्रेम में आइये: बात शुरू करने से पहले निराशावादी नहीं, बल्कि आशावादी बनिए। कभी कभी हकलाने का डर हकलाहट का कारण बन जाता है।[१] उससे डरने, और यह सोचते रहने की जगह कि अभी वह हो जाएगा, कोशिश करिए कि आप सफलता की कल्पना करें। इससे आपको होने वाली किसी भी परेशानी को नष्ट करने में सहायता मिलेगी।

7
बोली सरल बनाने के लिए सांस लेने की एक्सरसाइज़ (exercise) का प्रयास करिए: अक्सर, हकलाने वाले व्यक्तियों को हकलाते समय सांस लेने में कठिनाई होती ।
सांस लेने की एक्सरसाइज़ करने से आवाज़ वापस पाने में बहुत सहायता मिल सकती है। बोलने में गति लाने के लिए, इनका परीक्षण करिए:
बोलना शुरू करने से पहले, कुछ गहरी सांसें लीजिये। कल्पना करिए कि आप पानी में डुबकी लगाने जा रहे हैं, और आपको डुबकी लगाने से पहलेगहरी सांसें लेना आवश्यक है। इससे आपका सांस लेना सरल हो सकता है, और उनको नियमित करने में भी सहायता मिल सकती है। यदि किसी सोशल स्थिति में, आपको ऐसा करने में असुविधा महसूस होती है, तब नाक से गहरी सांसें लीजिये।
जब आप बोलें, और यदि हकलाएँ, तो सांस लेने की याद रखिए। जो लोग हकलाते हैं, वे अक्सर हकलाहट शुरू होते ही सांस लेना भूल जाते हैं। ठहरिए, अपने आपको सांस लेने के लिए कुछ समय दीजिये, और शब्द, या वाक्य से फिर से सामना करिए।
किसी प्रकार के स्पीड रेकॉर्ड बनाने की कोशिश मत करिए। तेज़ बोलने वाले तो बहुत से हैं, मगर आपका लक्ष्य उनकी तरह बोलना तो नहीं है। आपका उद्देश्य तो सिर्फ़ यह है कि आप अपनी बात कह सकें, और उसको समझा जा सके। आम गति से बोलना सीखिये। न तो कोई जल्दी है, और न ऐसा कोई मुक़ाबला, कि कौन किसी और से बातों में जीत सकता है।

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अपनी बातों में थोड़ी लय लाने का प्रयास करिए: जो लोग हकलाते हैं, वे गाते समय नहीं हकलाते हैं: इसके बहुत से कारण हैं, गाते समय शब्दों को खींचा जाता है, तथा उनकी आवाज़ स्मूथ (smooth) होती है, और उसको आम आवाज़ से अधिक सरलता से निकाला जाता है। यदि आप अपनी आवाज़ में थोड़ी लय ले आते हैं, (उसमें मार्टिन लूथर किंग, जूनियर जैसे भाषण देने के गुण ले आयें) तब शायद आप पाएंगे कि या तो आपकी हकलाहट कम हो जाएगी, या बिल्कुल ही चली जाएगी।

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यदि आप भाषण दे रहे हों, तब किसी की भी ओर सीधे मत देखिये: या तो लोगों के सिरों के ऊपर देखिये, या कमरे में पीछे किसी बिन्दु पर देखिये। इस तरह से आप उतने नर्वस नहीं होंगे जिससे कि हकलाने का चेन रिएक्शन (chain reaction) शुरू हो जाये।
यदि आप किसी से आमने सामने बात कर रहे हों, तो देखिये कि क्या आप उनसे नियमित रूप से आँखें मिला पाते हैं। आपको उन्हें पूरे समय घूरते रहने की आवश्यकता नहीं है, मगर आँखें मिलाने से वे सहज हो जाएँगे, और उससे आपको भी सहज होने में सहायता मिलेगी।

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छोटी छोटी बातों पर परेशान मत होइए: यह समझ लीजिये, कि गलतियाँ तो आपसे होंगी ही। मगर, केवल गलतियाँ ही तो नहीं होंगी। आप किस प्रकार उन गलतियों से वापस आते हैं, और कैसे अपना धैर्य बनाए रखते हैं, वह महत्त्वपूर्ण है। समझ लीजिये कि कुछ लड़ाइयाँ तो आप हारेंगे, मगर आपका लक्ष्य तो महायुद्ध पर विजय प्राप्त करना है 

    हकलाना १००% ठीक होता है ? Book online
इसका उत्तर देना मुश्किल है. बहुत से लोग, बहुत अच्छे से, हकलाहट को काबू कर के, अपनी लाइफ को इंजॉय कर रहे है. बहुत से लोग, बहुत जगह, ट्रटमेंट ले कर हार चुके है, और  इंटरनेट में नेगेटिव आर्टिकल्स, वीडियो, लोड कर रहे है, और आप देख रहे है,  मेरे विचार से, आप हकलाहट  को,  बहुत अच्छे से कण्ट्रोल कर सकते है, ( जैसे ऋतिक रोशन ) ,अपनी लाइफ को एन्जॉय कर सकते है , वो सारे फैक्टर जो आप को परेशान करते है,आप कण्ट्रोल हो सकते है,  बस जरुरत है सिस्टमैटिक  वर्क करने की , जैसे शुगर की बीमारी कण्ट्रोल होती है, वैसे स्टम्मेरिंग को भी कण्ट्रोल कर सकते है।  थोड़ी से सावधानी रख कर, आप लाइफ को सफल बना सकते है, थोड़ी  देर के लिए, हम  मान  लेते है, की हकलाना ठीक नहीं होता, जैसे शुगर की बीमारी ठीक नहीं होती , परन्तु शुगर कण्ट्रोल करने के लिए लोग सिस्टमैटिक ट्रीटमेंट लेते है, और कण्ट्रोल होने पर, थोड़ी थोड़ी मेडिसन और सावधानी रख कर लाइफ को एन्जॉय करते है,आप भी इस प्रकार सोच सकते है  की, इस बेकाबू हकलाहट को कण्ट्रोल  करने के लिए सिस्टमैटिक  ट्रीटमेंट लगे  ,फिर थोड़ी थोड़ी सावधानी रख कर कण्ट्रोल करते रहेंगे  और लाइफ को एन्जॉय करेंगे , हकलाहट का जादू  जल्दी , मेडिसिन , सर्जरी  से ट्रीटमेंट नहीं है , जैसे गाना गाना सीखते है ,डांस करना सीखते है , ड्राइविंग करना सीखते है वैसे इसको सीखना होता है वर्क करना होता है ,समय देना होता है , मन लगाना होता है , अपने आप में इंटरेस्ट पैदा करना होता है  

Stutter is 100% OK?
It is difficult to answer. Many people, very well, have been able to control their stubbornness, are enjoying their life. Many people have lost their lot in the trot, and have been doing negative articles, videos, and loads in the internet, and you are watching, in my opinion, you can control the deception very well, ( Like Hrithik Roshan), you can enjoy your life, all the factors that bother you, you can control, just need to do systematic work, like sugar syrup is in control, stammerin That can also control. By taking a little caution, you can make life successful, for a while, we assume that stutter is not good, like sugar syrup is not good, but people take systematic treatment to control sugar, And when you control, you enjoy life by keeping a little medication and caution, you can also think that in order to control this uncontrollable stigma, systematic treatment will take place. They will keep control while keeping a little bit of caution and will enjoy life, stuttering magic is not quickly, medicines, there is no treatment with surgery, as the songs learn to sing, learn to dance, learn how to drive, it has to learn how to work It is time to give time, have to think, to create an interest in itself
 

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                                                       SURAJ STAMMERING CARE CENTRE                                                                     Book Online
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